शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

हो गई अनसुनी हर दुआ अब मेरी


गला सूख रहा है
लबों पर जो बातें हैं
उन्हें बोलने मे जुबां साथ नहीं दे पा रही
अचानक ही हुआ या
 धीरे-धीरे चूसा जा रहा था
कई दिनों से मेरे  जेहन की नमीं को
गले का सूखना
बातों का जुबां पर ही रुकना
ये प्यास काफी बड़ी लगती है।
ये जज्बात जो यूं जन्में हैं
इनकी जड़ें कहीं नजर नहीं आती।
जख्मों की टहनियां सी हैं बस
जिनसे मवाद रिस रहा है।
गहरे घाव और
दवा-दारु की खोई खिदमत नहीं
फिर अचानक दुआओं का अनसुना
हो जाना भी तय हो गया है।

2 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

kabil-e-tariff jitni prashansha ki jaye utni kam pad jati hai, shabon ke bhandon mein hamrae prashnsa ke shabad sukh gaye

mai... ratnakar ने कहा…

अचानक ही हुआ या
धीरे-धीरे चूसा जा रहा था
कई दिनों से मेरे जेहन की नमीं को
mind blowing!!! awesome!!!!!!!!!!!

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