रविवार, 29 मार्च 2009

अजीब दास्ताँ है ये ..........

फ़िर वही फूट डालो और शासन करो की नीति

ये क्या था आजाद होना अंग्रेजो से

की उन्हें उनके देश भेजकर

हम अपने ही देश में उनके जैसे हो गए

उनके होते हिंदुस्तान बना था ,भारत और पकिस्तान

और उनके ही जैसे बनकर अपने होते हम........

बना रहे और बनने दे रहे है

भारत को जन्गिस्तान !!!!!!!!!!!!!!..............................

जहा जुंग छिडी है

कुछ भी कर के , कैसे भी करके

हर जर्रे अपना कब्जा ज़माने की

माँ -बाप को बुढा होते देखकर जैसे

नालायक औलाद साजिश करती है

जायदाद के कागजो पर दस्तखत करवाने की

वैसे ही साठ की उमर पार कर चुके इस देश

के रहनुमा जुगत में है इस देश को दफनाने की

सियासत की सरजमीं बनाकर इसे अब वो नया इतिहास बनायेंगे

बिल्लियों को लड़वाकर >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>उनके झगडे का फायदा उठाकर>>>>>>>>.

उनके हिस्से की भी रोटी खायेंगे >>>>>>>>>>>>>

जानती हूँ की बहुत कड़वी बातें लिख दी है मैंने............... वो कविता जो दिल की बातें बड़े ही सुंदर लहजे में लिखती है उसे बहुत कठोर बना दिया लेकिन अब शायद वक़्त ही नही है कविता करने का लेकिन ये शौंक मुझे बहुत अज़ीज़ है इसलिए लिखे बिना रहा नही गया इस वक़्त में करना तो बहुत कुछ है लेकिन फिलहाल कलम और कीबोर्ड के अलावा कोई और हथियार नही है इसलिए इसी से काम चला रहे है

सामाजिक अध्यन की किताबों में कई दफा पढ़ा है भारत सबसे बडा लोकतान्त्रिक देश है और जाहिर है जब तक हकीकत से वाकिफ नही थी तब तक पढ़कर बहुत गर्व होता था लेकिन अब लगता हिया ये लोकतान्त्रिक व्यवस्था ही गड़बड़ कर रही है क्योंकि इस व्यवस्था में कानून तो है लेकिन साठ ही बहुत कुछ आपकी और हमारी नैतिकता पर भी निर्भर करता है मसलन हाल ही की बात लीजिये हमारे मौलिक अधिकारों में लिखा है की हमें अभिव्यक्ति की आज़ादी है ये हमारा कानूनी हक है लेकिन इसका मतलब ये तो नही की इस हक के नाम पर आप कुछ भी कह दे यहाँ से शुरू होती है नैतिकता की कहानी अब भाजपा के एक युवा नेता ने जो कहा उसके बारे में हर तरफ़ टिका टिप्पदी हो रही है लेकिन ये तो अभिव्यक्ति की आज़ादी है !!!!!!!!चलिए दूसरा उद्धरण लेते है चुनाव अच्छे तरीके से हो निष्पक्ष हो और भी कई तरह के जुमले लगवा कर चुनाव आयोग का निर्माण हुआ तो मतलब ये एक संवेधानिक संस्था हुई लेकिन इसकी सलाह पर या इसके हिदायत देने पर अपराधियों को टिकट न देना ,आचार संहिता का पालन करना अपशब्द न कहना ये सब व्यक्तिगत या पार्टीगत नैतिकता पर निर्भर करता है चलिए राजनीति से जुड़े मसले से यदि ऊब रहे है तो एक हटकर उद्धरण दिये देती हूँ २००८ के सितम्बर महीने मई दिल्ली पुलिस ने एक विवाहित जोड़े को रेलवे स्टेशन पर्व चुम्बन करते हुए पाया तो उन्हें पकड़ लिया लेकिन इस पर्व कानून का फ़ैसला यही था के शादीशुदा लोगो का किस करना गैर कानूनों नही है लेकिन अनैतिक जरुर है लिहाजा इन्हे सजा नही दी जा सकती तो लीजिये यहाँ भी आ गई नैतिकता .........................

अब ये नैतिकता क्या है इसे समझते तो सब है लेकिन जब अनैतिक करने पर्व कोई डंडा नही पड़ने वाला है तो काहे किन फिक्र ऐसा भी नही है किन इस अनैतिकता का विरोध नही होता ............होता तो है लेकिन सामने आकर चोर को चोर कौन बोले ????????????????? इसी मैं बाद में ..........मैं बाद में .......के chakkar में panch saalo का political atyachaar saihna पड़ता है

काफ़ी कुछ कह दिया लेकिन क्या करूँ इतने मुद्दे है किन अलग लिखने किन बजाये मैंने एक ही में काफी कुछ कहने किन उत्पतंग सी कोशिश कर दी

चलते चलते एक बात और याद आ गई हमारे एक गुरु जी है उन्होंने मजाक में एक दिन ये बात कही थी लेकिन मई अज काफी सीरियस नोड पर्व इसका जिक्र कर रही हूँ उन्होंने कहा था जब किसी को कनवेंस नही कर सको तो उसे CONFUSEकर दो और हमारे लोकतंत्र में किसी को भी अपना दल बनने का अधिकार है तो आज अनगिनत

अज्नितिक पार्टिया हमें कनवेंस करने किन कोशिश में लगातार कान्फुजे कर रही है अब ये कितने बडा कांफुजन है ये तो अगले प्रधानमन्त्री का नाम ही बताएगा

शनिवार, 28 मार्च 2009

बारिश की बातें







कहीं लौट आई है फिर वो बारिश




जो वादा कर के गई थी वापस आने का




वहीं से आती मिटटी की ये सौंधी खुशबू




कह रही है किसी के मिलन की कहानी




लेकिन कहीं आज भी




इन्तजार है बारिश की बस एक बूँद का




वहीं से आती ये गीली सीली सी हवा




बता रही है किसी के विरह की दास्ताँ




और यहाँ मैं सोच रही हूँ की ............इतना भेद क्यों ?????????




व्ही धरती व्ही आसमान




पर कही खिले फूल और कहीं बंजर सा जहाँ




न जाने धरती की बेवफाई है ये !!!!!!!!




या है आसमान का अभिमान !!!!!!!!!!!!




जाना तो बस इतना की




बारिश की वो नन्ही बूंदे बिच सफर में ही




कहीं रुक गई है




कहीं mud गई है




किसी के प्यार की वजह से




किसी से प्यार के कारन

रविवार, 22 मार्च 2009

कुछ सच कुछ अफसाना

अभी कुछ दिन पहले जब मैं कॉलेज जा रही थी तो पुरानी सीमापुरी के पास से बस निकली जैसा की हमेशा ही निकलती है लेकिन उस दिन बस में मैंने दो १०-१२ वर्ष की स्कूल गिर्ल्स को बात करते सुना --------------------एक कह रही थी तुझे पता है स्लम डोग किसे कहते है ? दूसरी ने कहा नही तो तू बता ....................तब उस लड़की ने बाहर की तरफ़ कूडे के ढेर से कूड़ा चुनते , कुछ अधनंगे बच्चो की तरफ़ इशारा करते हुए कहा इन्हे कहते है स्लम डोग !!!!!!!!! .................................!!!!!!!!!!!!!!!!!! उनकी आगे की बातचीत सुनती इससे पहले ही मेरे अपने मन में बातचीत शुरू हो गई जिसका थोड़ा बहुत अंश अज लिख रही हूँ ---------------------------------स्लम डोग मिल्लानिओर को ऑस्कर मिलना बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों के लिए गर्व की बात है क्योंकि इस फ़िल्म के जरिये उनकर कलाकारों की कला को पहचान मिली नाम मिला तो जश्न होना लाज़मी है उस पर्व कुछ भी कहना कोई मतलब नही रखता .........जो बात मायने रखती है वो है फ़िल्म को ऑस्कर मिलने के बाद की कहानी क्योकि आपके और मेरे जैसे आम लोगो का सरोकार रील लाइफ से नही बल्कि रियल लाइफ से है तो इस रियल लाइफ की बानगी का थोड़ा सा जिक्र जरूरी हो जाता है ------------स्लम डोग को अगर स्लम के किसी बच्चे ने देखा हो या उसकी कहानी के बारे में सुना हो तो उसने क्या सोच होगा ?? क्या उसने ये सोचा होगा की वो भी क्रोरेपति बन सकता है ???? मैं ये बात काफी दिन से सोच रही थी इस बात का जवाब मुझे समझ आया जब ये पता लगा की इस फ़िल्म में काम करने वालें बच्चो को कुछ नही मिला तो स्लम के कूडे के ढेर पर्व बैठे बच्चे क्या सपने देखते होंगे सिवाय इसके की आज उन्हें कूडे में कोई कीमती चीज मिल जाए यहाँ तक सुनने में क्या की इस फ़िल्म के बाल कलाकार सलमान, शाहरुख़ और अरबाज़ के शूटिंग की वजह से लिए गए २ महीने अवकाश के कारन स्कूल से उनका नाम काट दिया गया है मीडिया में ये ख़बर आ चुकी है लेकिन ख़बर सुनने का वक़्त शायद उन लोगो के पास नही है जिनकी ये जिम्मेदारी बनती है की वो इस विषय पर्व कुछ करें ..............हाल ही में ये बाल कलाकार सोनिया जी से मिलने उनके आवास पर्व भी गए इससे पहले भी स्मिले पिंकी की पिंकी भी राष्ट्रपति से मिल चुकी है लेकिन क्या फर्क पड़ता है ...........चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात \\\बोल्ल्य्वूस्द ने स्लम डोग की कामयाबी पर्व जश्न मनाया समझ आता है लेकिन देश के विकास और उन्नानती का दावा करने वाले किस बात पर्व इतराने लगे समझ नही आता जय हो से स्लम डोग की जय हो गई मतलब सबकी जय हो ये जरूरी तो नही ....................अभी थोडी देर पहले ही विनोद दुआ मुंबई के धारावी से (जहाँ इस फ़िल्म की शूटिंग हुई है एक स्लम एरिया ) दिल्ली चलो प्रोग्राम पेश कर रहे थे हमेशा की तरह वो तो अपने शब्दों से टिप्पदी कर ही रहे थे लेकिन मुझे उस इलाके की फुटेज कपो देखकर जो बात दिखाई दी वो ये की यहाँ बनने वाली फ़िल्म ने १००० करोड़ रूपये कमाए लेकिन यहाँ रहने वालों की ज़िन्दगी में कुछ नही बदला ऐसे में जिसे हम और आप मुंबई वालों का जिंदगी जीने का जज्बा कहते है मुझे वो मजबूरी लगता है क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी की जद्दोजहद उन्हें रुकने नही देती और हालत उम्हे आगे बढ़ने नही देते

बुधवार, 18 मार्च 2009

हम से है जमाना सारा .......................

कहने को पुरे देश में जिस बात की सबसे अधिक चर्चा है वो है ----आम चुनाव लेकिन इस दौरान sunaaee देने वाली बातें , दिखाई देने वाले द्रश्यों सब कुछ खास एक्सक्लूसिवs जान mहै जिसे और विश्लेषण में मुझे खासी म्हणत करनी पड़ रही है सोचती हु काश मेरे शिक्षक औत अभिभावकों ने मुझे इंग्लिश ,मैथ और विज्ञानं पड़ने पर या जोर देकर मुझे politicle science padne को प्रोत्साहित किया होता to आज मैं बेहतर स्थिति me होती क्योंकि vigyan की khohj और math के formule to फ़िर भी समझ आ jate है लेकिन rajniti samajhna bda ही mushkil है samjhna chahun भी to कहा से shru karu चलिए B.J.P और CONGRESS को समझ लिया लेकिन इतना काफ़ी नही है क्योंकि ये कतार बहुत लम्बी है ________________----------------------------------------------------------------------मैं शायद इतनी लम्बी kataar यहाँ न दिखा paun अनेक neta अनेक दल औरसभी के अलग अलग shabdo से बने एक जैसे narey
इन अनेक rajnitik दलों की वजह कोई विशेष vichardhara या मुद्दा नही है वजह है विशेष बोली विशेष जात और विशेष धरम ये स्थिति dekhkar कहना पड़ता है की beshaq british gulami से to hame azadi मिल गई लेकिन आज भी अपने ही बनाये जात - पात , धरम और sampradaye के bandhano me हम jakde हुए है कोई AJGAR (AHIR,JAT ,गुजर,RAJPUT )का FORMULA banata है to कोई MUSALAMAN को sath लेकर MAJGAR बन jata है और मेरे जैसे लोग समझ ही नही paate की भाई mamla क्या है कितने gambhir vishleshan के बाद हमारी जैसी janta को bevkoof बनाने का shadyantr racha जाता है और आप और हम जान भी क्या सकते है सिर्फ़ utna जो T.V या akhbaar me देखते है
चलिए हाल ही की ताजा घटना की बात karey varun गाँधी का bayan ----------------------जो hath हिंदू के ख़िलाफ़ खड़ा होगा मैं उसे kaat दूँगा वैसे varun के अनुसार ये उनका bayan नही है क्योंकि उनकी awaz बहुत soft है और जिस C.D को T.V पर दिखाया जा रहा है वह आवाज़ कठोर ....................... है............ खैर हम क्या जाने............ हम जो देखते है वह लिख रहे है लेकिन मैं ये सब aj किसी neta या दल पर aarop लगाने के लिए नही लिख रही apke और अपने लिए लिख रही hun kyoki हम sobhagya से एक loktantrik देश के naagrik है लेकिन ये हमारा durbhagya ही है की praja का shasan होते हुए भी praja neta के vaade और naare की kathputli बन कर reh गई है aj एक neta हिंदू की बात bolkar हिंदू का vote ले लेता है कल कोई दलित की बात करके दलित का vote ले लेता है क्या बस यही है hamara हिंदुस्तान और anekta मैं उसकी एकता
हम अपनी जात वाले neta की vote देते है या फिर vote ही नही देते हम jante हुए भी अपनी jammedari नही nabhate और dosh लगा देते है सरकार पर लेकिन ये क्यो भूल jate है की ये सरकार achi या buri जो भी है हमारी ही चुनी हुई है हमें ख़ुद से एक बार ये puchna होगा की -------------------"क्या हम भी उसी vyavstha के aang है जिसके isharon पर joognuon को ही ghoshit कर दिया गया है prakash poonj और sooraj को andheron me gayab कर दिया गया है "
raajniti को samajhna शायद mushkil हो लेकिन यदि हम ख़ुद ये समझ जाए की इस vyavstha को बदलने और बेहतर बनने me सबसे बड़ी bhumika हमारी है tab yakinan कुछ बदली हुई si fiza हमारा स्वागत karegi बातें और भी है कहना कुछ और भी है लेकिन समझदार के लिए ishara ही kafi है लोकसभा chunav najdik और हमारी pariksha भी देखते है इस बार हमारी सरकार हिंदू की banegi musalmaan की या फिर hindustaan की

सोमवार, 2 मार्च 2009

पट्रोल भी है पूँजी

आजकल विज्ञापन की दुनिया काफी विस्तृत होती जा रही है .....काफी कुछ कह रहे है आजके विज्ञापन जो लंबे लंबे भाषण नही कह पा रहे है ...........अभिषेक बच्क्चन का वाट एन आईडिया सर जी हो या डेमोक्रेसी का प्रचार या फ़िर ................ पि सी आर ऐ का सेव फिउल वाला विज्ञापन ..................जिसकी स्क्रिप्ट कुछ इस तरह है ......

बेटा -----( सिग्नल पर भी इंजन स्टार्ट रहते देखकर ) पापा मई बडा होकर साइकिल पंचर की दुकान खोलूँगा

पापा ------(आश्चर्य से !!!!!) क्या ????? क्यो????

बेटा -------जिस तरह आप पेट्रोल वेस्ट कर रहे है उस तरह भविष्य में तो पेट्रोल बचेगा ही नही तब तो सब साइकिल ही चलाएंगे न !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

छोटा सी बातचीत और एक बडा गंभीर संदेश .............जिसे समझना आज बहुत जरुरी है क्योकि आज नही समझा तो सच में ही साइकिल, बैलगाडी, और खच्चरों का जमाना वापस आते देर नही लगेगी

कुछ ही दिन पहले की बात है पेट्रोल डीजल के दाम बदने की वजह से काफी बड़ी हड़ताल हुई थी जिससे सरकार और जनता दोनों को काफी समस्या का सामना करना पडा था ..............हड़ताल तो ख़तम हो गई लेकिन एक विवाद एक प्रशन मेरे दिमाग में उठाना शुरू हुआ की हम इस कदर तेल के गुलाम क्यो है ?????????

भारत में पेट्रोल पर निर्भरता पश्चिमी देशो की देखा-देखि ठाट बाट की ज़िन्दगी को प्रोत्साहित करने का परिणाम है ये जानते हुए भी की हमारा अपना पेट्रोलियम भंडार अत्यन्त सिमित है उर्जा के लिए पेट्रोल पर निर्भरता लगातार बढ़ाई जा रही है

हाल ही में लॉन्च हुई नैनो मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक लुक्षुरिऔस लाइफ का सपना सच करवाने का जरिया है सुनकर मुझे भी खुशी हुई की एक गाड़ी मैं भी खरीद सकती हु लेकिन ये जानकर उतना ही चिंता भी हुई की अगर इस तरह एक एक आदमी अपने लिए अलग अलग गाडिया खरीदने लगा तो पेट्रोल का बडा संकट पैदा हो जाएगा ये सिर्फ़ एक ख्यक नहीं है बुनियादी हकीकत है ............

जब हम इस हकीकत को नजर अंदाज कर जनभुजकर पेट्रो पर अपनी निर्भरता बढ़ाते है तो ये उसी तरह लगता है जैसे पुरखो की संचित सम्पति को कोई बिगड़ी औलाद बर्बाद कर देती है और बाद में पछताती है