शनिवार, 23 मई 2009

नियति


फूलों को जब भी खिलते देखती हूँ तो ऐसा लगता है की उम्मीद ,विश्वास और आस्था अभी बाकि है ........अभी अंत नही हुआ है आशाओं का ......................
हर शाम मुरझाने वाले फूल भी जब हर सुबह नै ताजगी के साथ प्रकर्ति का श्रृंगार करते है तो ये एहसास होता है की जिंदगी का हर दिन बहुत ख़ास है ....जिंदगी हट आने वाले दिन को बेहतर बनने का ही प्रयास है ..........
...............डाली से अलग होकर भी जब ये फूल अपनी सुगंध फैलाते है , हट मन को महकते है ........तब बिना कुछ कहे खुशियाँ बाँटने का संदेश दे जाते है .....
लेकिन रंग , रूप , और खुशबू से सजी सुन्दरता की अनुपम कृति ये फूल क्या पाते है ????????????????
अस्तित्व कितना खूबसूरत है इनका मगर अस्ति की नियति तो पहले ही फ़ैसला ले चुकी होती है................................ वो कहती है ..............................
निर्माण भी नियति है
निर्वाण भी नियति है
ये नियति तो अपने को पुरा करेगी ही
फिर वो फूल है तो क्या हुआ !!!!!!!!!!
फूल से पंखुडी !!!!!!!!!!!!!!! तो झडेगी ही

रविवार, 10 मई 2009

माँ तुझे सलाम !!!!!!!!!!!!!

माँ
सोच में हूँ की कैसे अलंकृत करूँ
इस एक व्यंजन को जिसका स्वर
मेरे पुरे जीवन का आधार है
घनी धुप में पेड़ की छाया कहूँ
या की कहूँ अंधेरों में रौशनी का एहसास
अतुल्निये हो तुम माँ .....................
फ़िर किस्से तुलना करूँ तुम्हारी
कौन है इस जग में तुम जितना ख़ास
असमंजस में पड़ जाती हूँ जब देखती हूँ
हर माँ में व्ही जज्बा
व्ही जज्बात
संघर्ष , समर्पण और सहनशक्ति की वो अद्भुत मिसाल
जीवन के हर मुश्किल दौर में उसकी दुआओं का साथ
देने को उसे क्या दूँ
उसकी ममता जितना अनमोल
कुछ नही है मेरे पास
हे इश्वर !!!!!!!!!!!!!एय अल्लाह
कबूल करना इतनी दरख्वास्त
जिस अंचल के सायें में
पली बड़ी हूँ ,,,,,उस झोली में खुशियाँ भर सकूँ
कर सकूँ कुछ तो रहमत तेरी
न कर सकूँ तो कभी उसे मैं कोई दुःख न दूँ

शनिवार, 9 मई 2009

खतरे में लोकतंत्र

चुनाव के चार चरण पुरे हो चुके है पहले चरण से लेकर अब तक यही हल्ला मचा हुआ है वोट दो!!!!!!! वोट दो
इस आम चुनाव में आम आदमी को लुभाने का हर सम्भव हथकंडा अपनाने के बाद अब नेता नतीजो की राह तक रहे है
लेकिन इन चार चरणों में हर लोकसभा सीट से जो सुचनाये सामने आई वो ये बताती है की मतदान प्रतिशत गिरता जा रहा है चुनाव आयोग की तमाम कोशिशों के बादलोगो ने पप्पू बनना स्वीकार किया है ..........................
किसी और की बात करूँ इससे पहले अपना निजी अनुभव बताना चाहूंगी .......................................
हमारे एरिया में जब नगर पालिका चुनाव हुए थे तब जिस उमीदवार को हमने यानि गली नम्बर ७ के लोगो ने वोट किया वो हार गया ............अब चाहे वोट देने से पढ़ले हम ये न बताये की किसे वोट देंगे लेकिन बाद में ये सब छुपाना आसन नही होता तो जीतने वाले उमीदवार को भी ये पता चल गया की हमारी गली उसके विरोध में थी या फ़िर विपक्षी को हमसे ज्यादा ही समर्थन प्राप्त था जिसका परिणाम ये हुआ की आज पुरे एरिया में सड़क बन चुकी है हमारी गली को छोड़कर कई बार ये समस्या पार्षद जी तक पहुचाई गई मगर वो तो जैसे प्रतिशोध की अग्नि में जल रहे है ..................... तो भइया जितनी आग उधर है उतनी इधर भी है अब हो रहे लोकसभा चुनावो में सताए हुए इन लोगो ने वोट न डालने की ठानी है
वैसे मेरे इस अनुभव का आप चाहे जैसा विश्लेषण करे की वोट डालना हम सबका फर्ज है वगैरह .........................
मगर जब हर बार मतदाता को मुंगेरी लाल के सपने दिखाकर भ्रष्टाचार ,आतान्क्वाद ,साम्प्रदायिकता ,और मंदी महंगाई के सच को उसकी हाथों की लकीरों में गुदवा दिया जाता है तब मतदान से मोह भंग होना स्वाभाविक बात हो जाती है ............. फ़िर भी जब उससे ये कहा जाता है की वोट दो तब उसका पहला सवाल यही होता है की किसे वोट दे जिसे वोट देंगे वो जीता तो भी वो अपनी जेब भरेगा और अगर जिसे नही दिया वो जीता तो बदला लेगा जितने के बाद उमीदवार तो नेता बन जाएगा हमें क्या मिलेगा भइया साल भर अपनी समस्यों मकी सुनवाई के लिए इध से उधर भटकते है कोई नही मिलता पूछने वाला अचानक चुनाव आते ही एक नही दस दस लोग रोज बतियाने आ जाते है ....................और फ़िर मतदान कम होना एक तो लोगो की नर्ष की वजह से है दूसरा जो लोग वोट देने गए भी उन्हें भी कई परेशानियों का सामना करना पडा कहीं लिस्ट में नाम नही कही पर्ची नही मिली हमारी आपकी तो चोदिये ख़ुद चुनाव आयुक्त को खासी परेशानी हुई..........................तो कई खामियां है जिनकी वजह से मोजुदा लोकतंत्र को खतरे के निशाँ पर लाकर खडा कर दिया है....................इस खतरे का समाधान जल्द ही किया जाना चाहिए कहीं ऐसा न हो की ...................................!!!!!!!!!!!!!!!!!
मिट गया जब मिटने वाला तब सलाम आया तो क्या
दिल की बर्बादी की बाद उनका पयाम आया तो क्या
काश अपनी ज़िन्दगी में हम ये मंजर देखते
और ......वक़्त आने पर बता देंगे तुझे ऐ आसमान अभी से हम क्या बताये के हमारे दिल में है

शुक्रवार, 1 मई 2009

हम हिन्दी भाषी

अभी कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी का घोषणा पत्र जारी हुआ था जिसमे कहा गया था की यदि उनकी सरकार आई तो हिन्दी भाषा को मुख्यधारा में लाया जाएगा अंग्रेजी का जोरशोर ख़तम किया जाएगा कंप्यूटर के इस्तेमाल का भी विरोध किया गया ...................................................................................
घोषणा पत्र जारी होने के बाद इन बातों का भी उतना ही विरोध किया गया जितना पार्टी ने अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर का किया था ............................
बात इतनी एकतरफा नही है चारों तरफ़ जुगलबंदी हुई और ढेरो निष्कर्ष सामने आए ...............विपक्षी दलों ने सर्वविदित लहजे में आलोचना के पुल बाँधे तो जनता के बीच भी कुछ नकारात्मक सी प्रतिक्रिया हुई अंग्रेजी और कंप्यूटर के बिना रहना!!!!!!!!!! ये सोचना भी हमारे प्यारे भोले भाले भारतवासियों के लिए अजीब और इतेफाक न रखने वाली बात हो गई है
दरअसल भारत में भाषा का सवाल इस कदर उलझ और बिगड़ गया है किं निकट भाविश्यें में उसका कोई समाधान नजर नही आता और अगर कोई समाधान के सा का भी जिक्र करता है वो दा से दुश्मन हो जाता है
क्योंकि हिन्दी सिर्फ़ गरीबों की भाषा है और अमीरों से देश चलता है ...........हिन्दी दिवस आने पर वो हिन्दी के ग्लोबल होने के दावे तब फीके पड़े नजर आते है जब एक अदद इमानदार और कुशल व्यक्ति को अपनी नौकरी सिर्फ़ इसलिए छोडनी पड़ती है या छोड़ने पर मजबूर किया जाता है की उसे अंग्रेजी नही आती है अपने देश में रहकर ऐसा पराया ऐसा सोतेला पण हर दिन लोग सहते है ................सोतेली माँ के आ जाने से जैसे बचे का विकास रुक जाता है वैसे अंग्रेजी के परवान चढ़ने से हिन्दुस्तान के हिन्दी भाषी कहीं खोने को मजबूर हो रहे है
घर में आज बचों को लाल रंग का गोल सा दिखने वाला एक फल दिखाकर ये नही बताया जाता की ये सेब है ये रटवाया जाता है की थिस इस अन एप्पल .....................जब मैं कुछ बच्चों को टूशन पढाती थी तब अक्सर बच्चे इंग्लिश समझ लेते थे और अक्सर हिन्दी को समझाने के लिए उन का अंग्रेजी अनुवाद उन्हें बताना पड़ता था क्योकि उनके अभिभावकों ने उज्जवल भविष्ये की कामनाएं सँजोकर उन्हें अंग्रेजी माध्यम वालें स्कूलों में डाला है जहाँ अंग्रेजी में बात न करने पर जुर्माना लिया जाता है ............................अब ऐसे माहौल में mulayam जी के इस vichaar का samarthan करने valon की tadaad का ungliyon पर gina जाना तय ही है लेकिन क्या अपनी tehjib को chodkar dusron की timaardari करना भी हमने तय ही कर लिया है क्या हम पहले ये सिखा नही सकते की ये लाल फल सेब है जिसे अंग्रेजी में एप्पल kehte है