मंगलवार, 26 जुलाई 2016

उदास रातें

उदास रातों में जो कविताएं लिखी जाती हैं
वो अक्सर दिन के उजाले को मैला कर जाती हैं।

उदास रातों में जो ख्वाब बुने जाते हैं।
वो जिंदगी की हकीकत को और कसैला कर जाते हैं।

उदास रातों में जिन लोगों को याद किया जाता है।
उन्हें दिन के समय य़ूं ही भुला भी दिया जाता है।

उदास रातों में जिन बातों से चेहरे पर हंसी आती है
उन्हीं बातों से दिन की रोशनी में आंखों के भीतर ही भीतर नमी आती है।

उदास रातें जो कहना चाहती हैं
उन्हें सुनने की हिम्मत दिन में कहीं खो सी जाती है।

उदास रातेॆ जब पास आकर बैठती हैं
तो उदासी दोहरी हो जाती है।
दिन भर की हंसी-खुशी कोरी हो जाती है।

बुधवार, 20 जुलाई 2016

प्यार की रफ कॉपी


प्यार को उस रफ कॉपी की तरह होना चाहिए था
जिस पर बार-बार गणित के सवालों का अभ्हयास किया जाता था।

पहले मासिक परीक्षा, फिर छमाही, फिर वार्षिक परीक्षा
हर परीक्षा से पहले कितनी ही कॉपियां भर जाया करती थीं
अभ्यास करते-करते।
फिर एक दिन सारा अभ्यास रद्दी में चला जाता था।
फिर एक दिन अभ्यास का असली नतीजा सामने आता था।
प्यार को उस नतीजे की तरह ही होना चाहिए था।
जो बार-बार अभ्यास के बाद सामने आता है।

मगर प्यार गणित के सवालों की तरह सिर्फ पेचीदा ही रहा
प्यार के गणित को बार-बार अभ्यास करके हल करने का मौका नहीं मिला।

एक भी कॉपी पूरी नहीं भर पाई।

जितने भी पन्ने भरे, सब पर काटे का निशान लगाना पड़ा।
सारे सवाल गलत हल हो गए थे।

अभ्यास करने का  मौका नहीं दिया गया।
समय पूरा हो चुका था।
उत्तर पुस्तिका छीन ली गई।


नतीजा क्या होता...।