रविवार, 31 जनवरी 2010

ख्वाब और जिंदगी

ख्वाबों की तस्वीर

में खुशियों की खुशबू होती है

बन्दे कि तक़दीर में

ख्वाब कि हकीकत नही

महज आरजू होती है

अफ्सानो कि चांदनी पर

जब असलियत कि धुप पड़ती है

तब जिंदगी की कहानी

पीछे छूट चुके किसी मोड़ की तरफ मुडती है

बेशक होती है

आवाज कुछ कहने के लिए

आँखें होती है देखने के लिए सब कुछ

और हाथ भी होते है करने के लिए बहुत कुछ

मगर खामोश सी जिंदगी

पल भर में सारी ज्ञानेन्द्रियों को अपाहिज बना जाती है

जिस तरफ न जाते है सपने

न सोच ही पहुचती है जहाँ तक

वाही कहीं दूर

जिंदगी की सड़क

हमारा मकाम बना आती है

अमूमन ही होता है ऐसा की हम जिंदगी को चलाते है

अक्सर जिंदगी ही हमें चलाती है

और चला जाती है

7 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

अमूमन ही होता है ऐसा की हम जिंदगी को चलाते है
अक्सर जिंदगी ही हमें चलाती है
और चला जाती है
कोई किसी को क्यो चलाये. स्वत: ही चलने दीजिए.
बेहतरीन भाव सुन्दर रचना

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

जिन्दगी की हकीकत....


धन्यवाद.

आरंभ

संजय भास्कर ने कहा…

बेहतरीन भाव सुन्दर रचना

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जिंदगी की हक़ीकत को ...... एक सच को ..... काग़ज़ पर उतार दिया है ..........

विचारों का दर्पण ने कहा…

''ए ज़िन्दगी तुझसे कोई सिकायत नहीं'' ....बहुत बढ़िया लेख

निर्झर'नीर ने कहा…

भावपूर्ण ,तल्ख़ हकीक़त से रु-ब-रु कराती रचना

संजय भास्कर ने कहा…

वाह .....himani जी गज़ब का लिखतीं हैं आप .......!!