गुरुवार, 14 जनवरी 2010

हर शक्स यहाँ इतना परेशान क्यों है (२)

वो मैं ही थी जो इस सोच में थी कि हर शक्स यहाँ इतना परेशान क्यों है लेकिन देखिये वो भी मैं ही हूँ जो इस सवाल के जवाब कि एक किश्त यहाँ लिख रही हूँ ....सुनी पढ़ी बातों से नही बल्कि खुद अनुभव करके ...या कहूँ कि
"खुद परेशां होंके हम समझे हकीक़त फ़साने कि " हुआ यूँ कि नौकरी कि तलाश में भटकते हुए मैं एक न्यूज़ चैनल के दफ्तर पहुची ...चैनल का नाम न जाहिर करते हुए सिर्फ ये कहना काफी होगा कि जिस तरह मैं मीडिया मैं संघर्ष के दौर से गुजरती नयी प्राणी हूँ जो पत्रकार बनना चाहती है उसी तरह ये चैनल भी कुछ वक़्त पहले ही चोथे इस्तंभ में शुमार हुआ है .....तो मैं रिसेप्शन पर पहुंची और उसके बाद हुआ संवाद कुछ इस तरह रहा
रिसेप्शनिस्ट - क्या काम है ?
मैं -एच आर डिपार्टमेंट में जाना है
रिसेप्शनिस्ट- किससे मिलना है ?
मैं - यहाँ कोई जॉब ओपनिंग है क्या ?
रिसेप्शनिस्ट-हा है तो आप को किससे मिलना है
मैं -मुझे उन्ही से मिलना है जो नए लोगो का इन्तर्विएव(साक्षात्कार ) ले रहे है
रिसेप्शनिस्ट- मैडम आप अपना रिज्यूमे यहाँ दे दीजिये हम आपको अइसे किसी से
नही मिलवा सकते
मैं -सर मेरे पास कोई रेफरेंस नही है कृपा करके मुझे किसी से एच आर में मिलवा दीजिये ताकि मैं खुद अपना रिज्यूमे उन्हें दे सकू ...
रिसेप्शनिस्ट-आप ज्यादा परेशान हो रही है तो मैं आपको एक बात बताना चाहूँगा कि यहाँ हर रोज १०० -१५०
रिज्यूमे आते है हम सारे ऊपर पहुंचा देते है लेकिन होता उन्ही का है जिनका कुछ जुगाड़ होता है ...हमारी तरफ से आप निश्चिन्त रहो हम तो पहुंचा देंगे ..लेकिन आगे का भगवान् मालिक है ॥
मैं ------------------अब इसके बाद मैं क्या कहती है काफी कोशिशों के बाद भी मुझे किसी से मिलने नही दिया गया और मैं निराश खली हाथ वापस आ गई .....हाथ लगा तो बस ये कुछ शब्द...आज कि एक नयी पोस्ट ....
अब समझ में आता है कि हर शक्स यहाँ इतना परेशान क्यों है ....अगर मीडिया में काम करने वाले अनुभवी लोगो में से कोई भी मेरे इस अनुभव पर रौशनी दाल पाए तो मेरी निराशा के ज्वार को थोडा सहारा मिल जायेगा .........क्योंकि अपना तो कोई जुगाड़ नही है भाई ......कब तक चलेगी ये शीत लड़ाई .......

4 टिप्‍पणियां:

Kishore Choudhary ने कहा…

सच है कि मुश्किलें हैं और ठीक ऐसा ही बर्ताव होता है
आप कुछ संजीदा लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलिए वे आपका मार्गदर्शन कर पाएंगे.

हृदय पुष्प ने कहा…

समय के सच को उजागर करता आपका लेख सच्चा और अच्छा लगा - "जीवन से न हार जीने वाले" कहते हुए आपके उज्जवल भविष्य की शुभकामना और नए साल में आपकी लेखनी को भी नए आयाम हासिल हों - शुभकामनाएं.

Udan Tashtari ने कहा…

हमें तो यह वाले मिडिया मंत्रों का अंदाजा नहीं है जी. वैसे तो हर जगह ही ऐसा हाल सुनते हैं मगर आप तो अपनी कोशिश जारी रखें.

निर्झर'नीर ने कहा…

अब समझ में आता है कि हर शक्स यहाँ इतना परेशान क्यों है ....कुछ तो पाया आखिर आपने एक जवाब ही सही .
वक़्त का उतार चढाव है जिंदगी .