मंगलवार, 1 सितंबर 2009

बात जनता पार्टी की जनता की

इन दिनों रियलिटी शोव्स से ज्यादा टी आर पि भारतीय जनता पार्टी की रियलिटी बटोर रही है .....एक एक करके सारी सचाई सामने आती जा रही है

ऐसे में चाय और पान की दुकानों पर बतियाने वाले बुद्धिजीवी लोग गाहे बघाहे अपनी यही राय बड़ी जोर शोर से सभी को सुनाते दिख रहे है की भइया अब तो गई भैंस पानी में इन बी जे पि वालों की .............. खैर हम न तो गली नुक्कड़ पर है न ही चाय की चुस्की या पान का स्वाद ले रहे है ..,,,हम देख रहे है देश प्रमुख विपक्षी दल का हाल और साथ ही विश्लेषण कर रहे है उनकी बदलती नीतियों और ततश विचारधारा का ॥ उन लोगो से भी हमारा निजी तौर पर कोई वास्ता नही जिन्हें पार्टी ने निकल दिया न ही उनसे जो तमाम कारगुजारिओं के बाद भी पड़ पर बने हुए है सार्वजानिक तौर पर हमारा लेना देना है पुरी पार्टी और उसके कार्यों से .......महांमारी ,महंगाई ,मज़बूरी और बांड सूखे की जद्दोजहद में जीने वाली भारतीये जनता की जनता पार्टी इन दिनों जन्नौंमुख होने की बजाय गैरजरूरी वजह से जिन्नाउन्मुख हो गई है इस वपक्षी दल के पास सत्ताधारी पार्टी का इन तमाम मुद्दों पर ध्यान दिलवाने का वक़्त नहिन्हाई क्योंकि यह अपनी हार के सदमे से ही अभी तक नही उभरी है ......पार्टी ने जितने के लिए जी तोड़ म्हणत की थी लेकिन जिस तरीके से म्हणत की वो दिखावटी था क्योंकि जिस युवा वर्ग को लुभाने के उदेश्य सेआडवानी जी ने ब्लॉग्गिंग और नेट्वर्किंग शुरू की थी

उनमे अधिकतर लोग जिन्ना के इतिहास और उसके कार्यों से वाकिफ नही है सिवाय इसके की वो विभाजन के परोकर थे हाँ वर्तमान हालत को देखते हुए ये युवा वर्ग इस बात का गवाह जरुर बनेगा की जिन्ना का नाम ही जनता पार्टी विभाजन का कारन बना .विभाजन भी ऐसा की

एक शाख के टुकड़े हजार हुए

कोई यहाँ गिरा कोई वहां गिरा

दरअसल जिस युवा वर्ग को लक्ष्य बनाकर पार्टी स्वं को स्थापित करना चाहती है उसे जिन्ना या गाँधी परकी गई तिप्पदियों से ज्यादा फर्क पड़ता है विकास की नीतियों से और फिर आज अगर गाँधी किसी के आदर्श है तो मायावती उन पर कितना ही आक्षेप क्यों न व्यक्त करे कोई फर्क नही पड़ते .......आज की पीडी अगर शाहरुख़ खान को पसंद करती है तो दीवानों की तरह करती है फ़िर चाहे अमर सिंह कितनी ही टिका तिपदी क्यों न करते रहे ये जो भी आदर्श व्यक्ति है समाज में इनकी छवि इतनी धुंधली नही है की एक किताब या बयाँ से मैली हो जाए तो अगर कोई दल युवा वर्ग को लुभाना चाहता है तो उसके लिए स्मार्ट लुक और चैटिंग ,नेट्वर्किंग से ज्यादा ख़ुद को ये समझाने की जरुरत है की आज देश की जनता राम नाम रटने वाले नेता नही राम की तरह काम करने वाले नेता चाहती है .................यही बात अगर बी जे पि समझ ले तो फ़िर नेत्रतेव चाहे अडवाणी करे या कोई और नेता पार्टी का पुनरुथान सम्भव हो सकता है अन्यथा हर रोज शाख से टूट कर गिरते पत्तों को बहारों की ही बाट जोहनी होगी

1 टिप्पणी:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

इस तरह के रियालिटी शो का अस्तित्व हमेशा रहेगा..और हर जगह चर्चा मे रहेंगे.
बढ़िया प्रस्तुति
बधाई!!!