शनिवार, 29 नवंबर 2014

तीन ब‌िंद‌िया

कभी बातों से पहले
और कभी बाद में दर्ज होती हैं
वो जो तीन ब‌िंदियां
असंख्य शब्द छिपे होते हैं उनमें
और 
सैंकड़ों भावनाएं
लाखों फलसफे
करोड़ों अफसाने भी हो सकते हैं 
आप स्वतंत्र हैं चुनने के ल‌िए 
जो चाहें।

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

क्या बात वाह बहुत उम्दा ;))

PAnkhuri Sinha ने कहा…

बहुत खूबसूरत कविता हिमानी, बधाई।