गुरुवार, 2 अगस्त 2012

बिछड़ने का दिन



उस तेज बारिश वाली एक शाम हम दोनों


बिछड़ने का दिन तय करने के लिए


मिलने का दिन तय कर रहे थे


कल आखिरी बार मिलेंगे


मैंने मन में सोचा था


उसे भी बताया था


और फिर हम मिले


उस दिन


और उसके बाद


बार-बार मिलते रहे


यूं ही


बिछड़ने का दिन तय करने के लिए

3 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन


सादर

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ...
और वो दिन कभी न आए जब बिछुड़ने की बात हो ..

Aharnishsagar ने कहा…

बेशक .. लाजवाब कविता हैं ..
जिस क्षण हम मिलते हैं उसी क्षण तय हो जाता हैं भविष्य का वो आगत क्षण
जब हम बिछड़ जाएँगे हमेशा के लिए ..!!