रविवार, 9 जून 2013

हर शहर में एक समंदर होना चाहिए...

मुझे नहीं मालूम...क्यों
लेकिन कुछ तो बात है इस शहर में
जो हमेशा से ये सपनों का हिस्सा रहा है।
और जब सपने सच
होकर सामने खड़े होते हैं
तो भावनाएं कहीं छूमंतर हो जाती हैं
शब्द कहीं लुप्त
और उस वक्त का
हर एक अहसास जैसे अमर हो जाता है।
ऐसा ही कुछ हुआ
बस अभी चंद घंटों पहले
जब मैंने मुंबई में कदम रखे।
एक अनजान शहर के बारे में
कुछ भी कहने के लिए
कुछ घंटे बेहद नाकाफी हैं
लेकिन यही इस शहर की खासियत है शायद
कि यहां सिर्फ कुछ पल बिताकर भी
शब्दों में अच्छा-खासा निवेश किया जा सकता है।
!!!
आसपास, चारों तरफ, दूर-दूर तक फैले अथाह पानी के बीच
भी जैसे... कोई जमीन तलाशकर अपने पैरों पर खड़ा हो...
...कुछ ऐसा ही शहर है मुंबई।
एक जगह
हर पल जमीन को अपनी आगोश में लेने की कोशिश करने वाला
समंदर है तो
दूसरी जगह
आसमान को अंगूठा दिखाती इमारतें।
जैसे पूरी कायनात से बैर पालकर ही ये शहर जिंदा है
और जिंदादिली की मिसाल भी
तभी तो यहां आने वाले किसी भी शख्स की जिंदगी
किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं होती है।
बेशक असल में हर कोई हीरो न
हीं बन पाता है
लेकिन यहां रहकर जिंदगी जीना किसी के लिए भी हीरोगिरी से कम नहीं है।
बड़ी-बड़ी उम्मीदें लेकर लोग यहां आते हैं...
और ये उम्मीदें उन छोटी-छोटी खिड़कियों से बाहर झांकती दिखाई देती हैं
जो यहां बनीं
और टूटने के लिए बेताब होते हुए भी
कई सालों से जस की तस खड़ी इमारतों में
बिलकुल वैसा ही दर्जा रखती हैं,
जैसा कि किसी सिनेमाघर में बालकनी की सीट।
यहां रहने वालों की दुनिया एक दूसरे से काफी अलग है
लेकिन कुछ चीजें बिलकुल एक जैसी हैं...

यहां टैक्सी चलाने वाले भैय्या से लेकर बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमने वाले सेलिब्रिटी तक
हर किसी के लिए इस शहर की जिंदादिली एक मिसाल है
और यहां लगने वाला घंटों का लंबा ट्रैफिक जाम... एक कभी न खत्म होने वाली परेशानी।
इसके आगे कुछ भी कहने से पहले मुझे अंग्रेजी की एक कहावत का सहारा लेकर बात खत्म कर लेनी चाहिए क्योंकि अंग्रेजी में कहते हैं कि

 "The most amazing travellers were to humble to write about it"

यहां मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है शायद
लेकिन एक बात जरूर है कि मुंबई से आने के बाद लगता है कि
हर शहर में एक समंदर होना चाहिए...

4 टिप्‍पणियां:

Yashwant Mathur ने कहा…

आपने लिखा....हमने पढ़ा
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए कल 12/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
धन्यवाद!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब .. मुंबई नगरी के एहसास को छूने का प्रयास है ये रचना .... लाजवाब रचना ...

rohitash kumar ने कहा…

बिल्कुल सही हर शहर में सुमंदर न सही...नदी और तालाब तो पाट दिे जाते हैं और उन पर कंक्रीट के जंगल खड़े होते हैं..समुंदर ही हमें घमंड के दौरान हमारी क्षुद्रता और निराश होने पर शक्ति का अहसास कराता है।

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही गहरे भावो की अभिवयक्ति......